मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर ड्रग ट्रायल की तैयारी

मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर ड्रग ट्रायल की तैयारी

भोपाल । एम्स भोपाल ने बगैर सरकार की इजाजत और बिना डब्लयूएचओ की परमिशन के कोरोना मरीजों पर ड्रग ट्रायल की तैयारी कर ली है। एम्स द्वारा जारी की गई एक जानकारी के मुताबिक कोविड-19 को रोकने के लिए इम्यूनोमॉड्यूलेटर माइको बैक्टेरियम डब्ल्यू पर एम्स अध्ययन करेगा, जबकि डब्ल्यूएचओ के नियम हैं कि इस ट्रायल के लिए पांच चरणों से गुजरना पड़ता है, जिसमें इंसानों को अंतिम श्रेणी में लिया जाता है। गौरतलब है कि एम्स में फिलहाल शहर के पॉजिटिव मरीजों के महज 1 प्रतिशत ही भर्ती हैं। एम्स डायरेक्टर सरमन सिंह ने अपने नेतृत्व में इस क्लीनिकल ट्रायल के लिए टीम का भी गठन कर लिया है। उसमें प्रोफेसर रजनीश जोशी, प्रो. देवाशीष विश्वास, डॉ. सौरभ सेगल और डॉ. सागर खडंगा के नाम शामिल हैं। कहीं मुनाफे का फंडा तो नहीं : रिसर्च के लिए इम्युनोमोड्यूलेटर का उत्पादन अहमदाबाद के मेसर्स कैडिला फार्मास्युटिकल लि. को जिम्मेदारी दी है। एम्स द्वारा दी गई एक जानकारी में बताया गया है कि इस अध्ययन को एफडीए (यूएसए) और आईसीएमआर भारत द्वारा अनुमोदित किया गया है। अध्ययन में रोगियों की भर्ती शीघ्र ही शुरू की जा रही है। अहमदाबाद के फार्मास्युटिकल को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद सवाल यह भी उठने लगे हैं कि कहीं ये कंपनी को फायदा दिलाने के लिए तो ट्रायल नहीं किया जा रहा । इस संबंध में एम्स के पीआरओ डॉ. लक्ष्मी प्रसाद ने कोई भी जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि जो जानकारी विज्ञप्ति में दी गई है वही फाइनल है।

 कई फेज में होते हैं क्लीनिकल ट्रायल

मेडिसिन के एक विशेषज्ञ डाक्टर के अनुसार क्लीनिकल ट्रायल के कई फेज होते हैं। इसमें भी इंसान पर ट्रायल तो बहुत बाद की बात होती है। ऐसे में कोरोना के इलाज के लिए ऐसे किसी ट्रायल की बात जमती नहीं। साथ ही हर फेज के लिए क्या एम्स तैयार है? ऐसा वैसे लगता नहीं है। एक एथिकल कमेटी भी बनती है, क्या एम्स ने वह बना ली है। अगर सब कुछ इतना आसान होता तो विभिन्न देशों को इसके इलाज के लिए मिलकर साथ काम नहीं करना होता। जैसे आईसीएमआर और डब्ल्यूएचओ साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वह भी यही देख रहे हैं कि कौन सी दवाएं या उनके कांबिनेशन असरकारक सिद्ध हो रहे हैं। अभी हाइड्रोक्लोरोक्वीन, रेमडिसिविर आदि को असरकारक बताया जा रहा है, तो आप ट्रायल बाद में करते रहें। अभी तो जो इलाज दुनिया भर में सक्सेसफुल माने जा रहे हैं, जिन्हें डब्लयूएचओ और आईसीएमआर मान रहा है, उन्हीं के आधार पर इलाज करें। इंसानी जिंदगी से आप खेल नहीं सकते।