6 माह से वृद्धा का ठिकाना बन गया रेलवे स्टेशन

6 माह से वृद्धा का ठिकाना बन गया रेलवे स्टेशन

जबलपुर । मुख्य रेलवे स्टेशन पर एक बुजुर्ग महिला जो करीब 6 माह से रह रही है,पहले प्लेटफार्म के अंदर रहती थी जब से लॉकडाउन लगा प्लेटफार्म के बाहर तपती दोपहरी में अपनी जिंदगी के दिन गिन रही है। किसी ने खाने दे दिया तो खा लिया नही तो भूखे रह कर जिंदगी काटने मजबूर है। ऐसे लोगो को सिर्फ ईश्वर पर भरोसा है उन्हें नहीं मालूम कोरोना क्या है। ना मास्क ना सेनेटाइजर का झंझट,खुले आसमान के नीचे जिंदगी बसर हो रही है। जानकारी के मुताबिक जबलपुर रेलवे स्टेशन पर वैसे तो कई बाहरियों का रहना होता है। फ्री बिजली,पानी,खाना और पंखे की हवा में चैन की नींद लेना उनकी आदत में है। कोरोना महामारी के चलते पूरा प्लेटफॉर्म खाली है कहीं कोई बाहरी,भिखारी आदि नहीं है। एक बुजुर्ग महिला जो लॉकडाउन के बाद से प्लेटफार्म एक के बाहर सरकुलेटिंग एरिया में पड़ी है। दिन,रात तपती धूप,अंधी,तूफान आये उसे कोई मतलब नहीं। कोरोना को लेकर जहां हर कोई भय के वातावरण में जी रहा है वहीं बुजुर्ग महिला को कोई भय नही है। वह 79 दिन से प्लेटफार्म के बाहर रह रही है। वह किसी से बात नहीं करती उसे किसी ने बैठे हुए नहीं देखा, हमेशा लेटी ही रहती है। बात करने पर बोलती भी नहीं।

आरपीएफ ने हटाने का प्रयास किया

बताया जाता है कि लॉकडाउन लगने पर आरपीएफ ने बुजुर्ग महिला को प्लेटफार्म से भगाने का प्रयास किया लेकिन वह मानी नहीं और प्लेटफार्म से बाहर रह कर जिंदगी बसर कर रही है। किसी ने खाने दे दिया तो खा लिया। भीख मांगना उसकी फितरत नहीं है। दरसअल महिला कहां की रहने वाली है किसी को पता नहीं वह कुछ बोल भी नहीं पाती।