ड्राइवरों-कंडक्टरों की तनख्वाह काटी, श्रमायुक्त से शिकायत

ड्राइवरों-कंडक्टरों की तनख्वाह काटी, श्रमायुक्त से शिकायत

भोपाल । बीसीएलएल के मार्फत संचालित लो  फ्लोर  बसों के ड्राइवरों-कंडक्टरों की तनख्वाह में कटौती करने और उनसे पूरी तनख्वाह देने के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का लेटर मांगने का मामला श्रमायुक्त तक पहुंच गया है। इधर, श्रम आयुक्त ने ड्राइवर-कंडक्टरों की यूनियन भोपाल सिटी यान चालक-परिचालक ट्रेड यूनियन को मय दस्तावेज और सबूतों के सोमवार को तलब किया है। ऐसे में ड्राइवरों और कंडक्टरों की तनख्वाह काटने लॉक डाउन अवधि की तनख्वाह न देने के मामले में बस ऑपरेटर कंपनियों पर कार्रवाई हो सकती है। बता दें कि भोपाल में नगर निगम की होल्डिंग कंपनी भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) प्राइवेट बस आॅपरेटर कंपनियों के मार्फत शहर के 16 रूट्स पर 210 लो μलोर और मिडी बसों का संचालन कराती है। इन बसों का संचालन करने वाले पांच सौ से ज्यादा ड्राइवर-कंडक्टर इन्हीं बस ऑपरेटर कंपनियों के कर्मचारी हैं। 22 मार्च को लॉकडाउन के बाद से शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद हो गया। हालांकि इस दौरान देश के प्रधानमंत्री ने सभी कंपनियों को आगाह किया था कि लॉकडाउन अवधि में वह किसी भी कर्मचारी की तनख्वाह न काटें और न ही उसे नौकरी से निकालें। लेकिन बस कंडक्टरों और ड्राइवरों के खातों में जब 10 अप्रैल को तनख्वाह पहुंची तो वह सकते में आ गए। दरअसल जिनकी तनख्वाह 12 हजार थी, उन्हें सिर्फ चार हजार रुपए दिए गए। जब इस मामले में उन्होंने बसऑपरेटर  कंपनी अधिकारियों से बात की तो उनका कहना था कि जितना काम, उतना दाम दिया गया है। इस पर जब ड्राइवरों ने उन्हें प्रधानमंत्री की बात याद दिलाई की लॉक डाउन में किसी की तनख्वाह नहीं कटेगी तो अधिकारियों का कहना था कि हमारे पास पीएम का कोई लेटर नहीं आया। 

पीएम और सीएम से शिकायत 

यूनियन अध्यक्ष अजीज खान ने बताया कि सभी ड्राइवर कंडक्टर बस आॅपरेटर कंपनी के कर्मचारी हैं, लेकिन बसों का संचालन बीसीएलएल द्वारा कराया जाता है। ड्राइवरों की तनख्वाह बस आॅपरेटर कंपनी ने काट ली है, लेकिन बीसीएलएल खामोश है। जबकि कंपनी को आगे आकर तनख्वाह दिलानी चाहिए। इस मामले में हमने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के साथ ही सीएम से भी शिकायत की है। जबकि श्रम आयुक्त इंदौर से शिकायत की जा चुकी है।