सिस्टर मरियम थ्रेसिया निधन के 93 साल बाद संत घोषित

सिस्टर मरियम थ्रेसिया निधन के 93 साल बाद संत घोषित

तिरुवनंतपुरम। पोप फ्रांसिस ने रविवार को 1879 में केरल के त्रिशूर में जन्मी सिस्टर मरियम थ्रेसिया को संत घोषित किया। थ्रेसिया ने मई 1914 में कॉन्ग्रगेशन आॅफ द सिस्टर्स आॅफ द होली फैमिली की स्थापना की थी। उन्हें संत की उपाधि मृत्यु के 93 वर्ष बाद दी गई है। 9 अप्रैल 2000 को सिस्टर थ्रेसिया को जॉन पॉल द्वितीय ने धन्य घोषित किया था। यह किसी भी कैथोलिक नन को संत घोषित करने की शुरुआती प्रक्रिया होती है। 

16 साल की उम्र से मरीजों के लिए करना शुरू किया था काम 

सिस्टर थ्रेसिया ने 16 साल की उम्र में हर्प्स से ग्रसित मरीजों के लिए काम करना शुरू किया था। 38 साल की उम्र में नन बनने के बाद उन्होंने 11 साल तक इस पद पर सेवाएं दीं। उन्होंने स्थानीय समुदायों के पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने और गरीबों की सेवा के लिए काम किया। 

पोप ने फरवरी में दी थी चमत्कारों को मान्यता

इस साल फरवरी में पोप फ्रांसिस ने सिस्टर थ्रेसिया के चमत्कारों को मान्यता दी थी। दावा किया जाता है कि 2009 में सिस्टर थ्रेसिया के अवशेषों को समय से पहले पैदा हुए एक बच्चे के सीने पर रखा गया। खराब स्थिति से जूझ रहा बच्चा स्वस्थ हो गया था। इस प्रक्रिया को पूरी करने वाली टीम में बच्चे का इलाज करने वाले डॉक्टर भी शामिल थे। 

कैननाइजेशन रोम में हुआ था सिस्टर थ्रेसिया का जन्म

सिस्टर थ्रेसिया का कैननाइजेशन (चमत्कारों को मान्यता देने की एक धार्मिक विधि) रोम में हुआ था। इस दौरान सैंकड़ों श्रद्धालु, भारत के चर्चों के लीडर्स और केरल के विभिन्न सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने भी शिरकत की थी। राज्य के विदेश मामलों के मंत्री वी मुरलीधरन ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। एक सप्ताह से त्रिशूर में सिस्टर थ्रेसिया के लिए विशेष प्रार्थना का आयोजन किया जा रहा था।