लॉकडाउन के बाद महंगे हो गए स्मार्टफोन

 14 Jun 2020 02:28 AM  3

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के बाद देश में लगे लॉकडाउन के करीब दो महीने बाद आर्थिक गतिविधि को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ शुरू करने की पूरी तरह आजादी दी गई है, इसके बावजूद मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम काज ठीक से शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में कई ऐसे प्रॉडक्ट है जिनकी डिमांड काफी ज्यादा है, लेकिन कंपनियां सप्लाई में पिछड़ रही हैं। बाजार में अभी स्मार्टफोन की जबर्दस्त डिमांड है। लो बजट और मिडियम बजट स्मार्टफोन की डिमांड इतनी ज्यादा है कि खरीदारों को निराश होना पड़ रहा है। स्मार्टफोन बाजार में शाओमी और ओप्पो का मार्केट शेयर काफी ज्यादा है। ये कंपनियां बजट स्मार्टफोन ज्यादा बेचती हैं। मेक इन इंडिया के तहत दोनों स्मार्टफोन देश में बनाए जाते हैं। मतलब आपको इन फोन पर मेड इन इंडिया दिख जाएगा, लेकिन वर्तमान हालात में लोकल मैन्युफैक्चरर्स डिमांड के मुताबिक सप्लाई करने में अक्षम हैं। ऐसे में इन कंपनियों को लो और मीडियम बजट वाले फोन आयात करने पड़ रहे हैं।

मजदूर के अभाव में कामकाज शुरू नहीं

भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को मई में ही खोलने से छूट मिल गई थी, लेकिन एक महीने के दौरान अब तक कामकाज ढंग से शुरू नहीं हो पाया है। स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का कहना है कि लेबर के अभाव में कामकाज शुरू नहीं हो पाया है। अनलॉक में हर सेक्टर के लोगों की शिकायत है कि मजदूर ही नहीं हैं तो कामकाज कैसे शुरू होगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान और मेक इन इंडिया की महत्वाकांक्षा इस तैयारी के साथ पूरी नहीं की जा सकती है। मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया प्रोग्राम को बल देने के लिए स्मार्टफोन आयात पर 10 पर्सेंट की कस्टम ड्यूटी लगाई थी।

बढ़ गया है जीएसटी

मतलब लॉकडाउन में टैक्स बढ़ाया गया। ऐसे में लॉकडाउन के बाद जब बाजार दोबारा खुले हैं और लोग दुकान जा रहे हैं तो कीमतें बढ़ी हुई हैं। कीमत में 15.20 पर्सेंट तक उछाल इसलिए देखा जा रहा है कि 6 पर्सेंट तो जीएसटी में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ-साथ जब इसे आयात किया जा रहा है तो 10 पर्सेंट का टैरिफ एक्स्ट्रा लग रहा है। इससे ग्राहकों की परेशानी बढ़ रही है। दुकानदार इसलिए परेशान हैं क्योंकि वे ग्राहक को इतना समझा नहीं सकते लेकिन ग्राहकों को तो पहले की तरह डिस्काउंट चाहिए।