7 लाख का हर महीने उड़ रहा धुआं, फिर भी और ताकतवर होकर उभर रहे मच्छर

7 लाख का हर महीने उड़ रहा धुआं, फिर भी और ताकतवर होकर उभर रहे मच्छर

जबलपुर ।  शहर को मच्छरों से मुक्त करने के लिए नगर निगम हर महीने करीब 7 लाख रुपए का धुआं उड़ा रहा है,इसमें 5 फागिंग मशीनें व 160 हैंड स्पे्र मशीनों के माध्यम से दवाओं और पेट्रोल डीजल में यह खर्च होता है। मजे की बात यह है कि इस पूरी कवायद में बजाय मच्छर मरने के और ताकतवर होकर उभर रहे हैं। अब यह बात जांच का विषय है कि नगर निगम जो रसायन व इंधन लगा रहा है उसकी निर्धारित मात्रा छिड़काव में होती है या फिर ये तकनीक मच्छरों पर बेअसर हो गई है और वे और अधिक पॉवरफुल स्पे्र चाह रहे हैं। मच्छर विनिष्टिकरण कार्यक्रम को एक साथ एक इलाके में किए जाने की बजाय अलग-अलग छोटे हिस्सों में किया जाता है इससे मच्छर एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं और थोड़ी देर बाद लौट आते हैं। लगातार मच्छर विनिष्टिकरण अभियान पर उठ रहे सवालों के बावजूद नगर निगम प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। नालेनालियों की सफाई पर नहीं ध्यान मच्छरों की सर्वाधिक उत्पत्ति नाले और नालियोंसे होती है,जिनकी सफाई की तरफ स्वास्थ्य विभाग का ध्यान ही नहीं है। ऐसे में ऊपर-ऊपर किए जाने वाले दवा छिड़काव का असर इन पर बिलकुल नहीं हो रहा है। मच्छर नालियों में जाकर छुप जाते हैं और छिड़काव के बाद फिर अपना तांडव दिखाने लगते हैं। इसका परिणाम यह नजर आ रहा है कि हर घर में बीमारों की कतार लगी हैं।

9 नए वार्डों में आज तक नहीं पहुंची मशीनें

इसके अलावा ग्रामीण से ननि सीमा में जुड़े 9 वार्डों के रहवासियों ने तो आज तक इन मशीनों केदर्शन तक नहीं किए हैं। यहां की सफाई व्यवस्था बदहाल है। इन वार्डों के इलाके भी काफी विस्तारित हैं। जिनमें शहरी व ग्रामीण इलाके शामिल हैं। यहां पर जाने की जहमत न तो हैंड स्पे्रे मशीन आॅपरेटर करते हैं और न ही फागिंग की छोटी या बड़ी मशीन। नए वार्डों के पार्षद सदन में इसकी आवाज उठाते-उठाते नि:शब्द हो चुके हैं।

ऐसे खर्च हो रहे 7 लाख

नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि शहर के सभी 79 वार्डों में फागिंग मशीन,पॉवर स्प्रे से मैलाथियान कैमिकल युक्त धुएं और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। एक घंटे में 10 लीटर पेट्रोल और 55 लीटर डीजल मशीनों में खर्च हो रहा है। इस हिसाब से पेट्रोल और डीजल में ही हर महीने 4 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं,जबकि दवाओं,कीटनाशक का खर्च 3 लाख रुपए प्रति माह बताया जा रहा है।

वार्डों में कहीं नजर नहीं आता धुआं उड़ते

फागिंग मशीनों का धुआं वार्डों में उड़ते कभी नहीं देखा जाता। हां कुछ खास वार्डों जहां नगर सत्ता या जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों का रहवास है वहां पर ये जरूर सक्रिय रहती हैं जिससे अधिकारियों को भरोसा दिलाया जा सके कि मच्छर विनिष्टिकरण अभियान जारी है। जहां तक आम जनता की बात है तो उसे ये मशीनें कभी नजर नहीं आतीं।