शहर की हवा इतनी साफ, लगता है यहीं शिफ्ट कर लूं : भूमि

शहर की हवा इतनी साफ, लगता है यहीं शिफ्ट कर लूं : भूमि

I Am Bhopal | ‘मेरी भोपालवासियों से अपील है कि कम से कम प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें। जब मुझे पता चला है कि इस ग्लोब को बनाने में 400 किलो से भी ज्यादा प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया है। यह एक अच्छा उदाहरण सेट किया है कि इतने रिसोर्स लगाकर ऐसे मॉन्युमेंट खड़े करते हैं। आज वाकई भोपाल शहर ने प्लास्टिक का यह ग्लोब खड़ा किया है, जिसके लिए सभी को बधाई देती हूं। मुझे खुशी है कि मैं इसका हिस्सा बन पाई।’ यह बातें एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने बोट क्लब पर कहीं। प्लास्टिक डोनेशन सेंटर की ओर से वेस्ट टू आर्ट सेल्फी पॉइंट की ओपनिंग एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर, कलेक्टर तरुण पिथौड़े, नगर निगम कमिश्नर बी. विजय दत्ता और डीआईजी इरशाद वली ने की।

मैंने भी प्लेनेट वॉरियर का इनिशिएटिव शुरू किया: आम लोगों की तरह मैं सोचती थी कि क्या करूं, आने वाली जनरेशन के लिए फ्यूचर कैसा होगा इस प्लेनेट का। सोचा कि क्या मुझे अभी से अपनी फैमिली प्लानिंग शुरू करनी चाहिए? मैं अपने बच्चों के लिए कैसा फ्यूचर छोड़कर जाउंगी। लकिली अच्छी एक्टर बन गई। एक एक्टर बनने के बाद मुझे लगा कि एक पॉवर मिला है उसको इस्तमाल करना चाहिए लोगों को अवेयर करनी चाहिए। वैसे भी मैं जैसी इंसान हूं अपने काम से अवेयरनेस फैलाने का काम करूं और इसलिए मैंने क्लाइमेट वॉरियर शुरू किया। सोशल मीडिया से करोड़ों लोगों तक आवाज पहुंच सकती है।

भूमि ने दिए शहर के लोगों को टिप्स

भूमि पेडनेकर ने बोट क्लब पर भोपालवासियों को टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि पानी बचाओ बचपन से सुनते आ रहे हैं। नल खोलकर ब्रश नहीं करना चाहिए, कुछ लोग आज भी अपनी जिंदगी में इन बातों का ख्याल नहीं रखते। छोटी-छोटी चीजों से बड़ा बदलाव आता है। कहते हैं बूंद-बूंद से सागर भरता है। आज वो प्रैक्टिस करने का समय आ गया है। सिंगल यूज प्लास्टिक इस्तेमाल न करें, प्लास्टिक को पूरी तरह अपनी लाइफ में बैन करें। प्लास्टिक के स्ट्रॉ मत इस्तेमाल करो थोड़ी परेशानी जरूर होगी, लेकिन छोटा सा चेंज बहुत कुछ बदल सकता है। मैं भी खुद सेट पर होती हूं तब स्टील की बोतल इस्तेमाल करती हूं।

यहां शूट के दौरान डिस्टर्बेंस नहीं होता

मैंने पिछली फिल्म ‘टॉयलेट-एक प्रेम कथा’ के समय भी भोपाल आई थी। अभी फिल्म दुर्गावती के लिए भी आई हूं, मुझे इस शहर से बहुत प्यार है। मैं तो कहती हूं आने वाली फिल्म के लिए भी भोपाल ही शिμट कर लूं। भोपाल वाकई में बहुत खूबसूरत शहर है। यहां के लोग अच्छे हैं। कभी भी शूट के दौरान किसी भी तरह की कोई प्रॉब्लम नहीं होती। शूट में डिस्टर्बेंस नहीं होता। यह बहुत कल्चर्ड सिटी है। मैंने भोपाल की सुबह महसूस की है, मैं रोज सुबह साइकिलिंग करती हूं। शहर की हवा इतनी साफ है, सच कहूं तो शहर वासियों के लिए यह किसी लग्जरी से कम नहीं है। आप सभी इतने लकी हैं कि इतने साफ-सुथरे शहर में रह रहे हैं।

प्लास्टिक बोतल से 3 महीने में बनाया ग्लोब

बोट क्लब पर 400 किलो प्लास्टिक को ग्लोब के सेल्फी पॉइंट को तैयार किया है। इसे बहुत समय से वेस्ट प्लास्टिक बॉटल इकठ्ठा कर तैयार किया है। इसे बनाने में मुझे लगभग तीन महीने का समय लगा है। मैंने प्लास्टिक की बॉटल्स से एक बॉल बनाई, उसके ऊपर अर्थ प्लेनेट की तरह पेंट किया है। 400 किलो प्लास्टिक से हम यही मैसेज देना चाहते हैं कि भोपाल वासी कम से कम प्लास्टिक का इस्तेमाल करें। -मोहम्मद काशिफ, आर्टिस्ट

मैं महिला फ्रीडम फाइटर का रोल प्ले करना चाहती हूं

एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने बोट क्लब पर आईएम भोपाल से खास बातचीत में ने कहा कि अभी अधिकांश फिल्में पुरुष फ्रीडम फाइटर पर ही बनी हैं। महिला फ्रीडम फाइटर में सिर्फ गिने-चुने नाम ही सुनने को मिलते हैं। यदि मुझे मौका मिला तो मैं महिला फ्रीडम फाइटर का रोल प्ले करन चाहूंगी। मीना कुमारी मेरी फेवरेट हैं। उनकी बायोपिक में रोल करना मेरा ड्रीम है। आॅडियंस नई कहानियां देखना चाहती है। भूमि ने कहा कि अब फिल्में सिर्फ एक्टर्स के नाम के कारण नहीं चलती। कंटेंट होना जरूरी हो गया है। आॅडियंस अब इस बात पर बहुत गौर करती है कि कहानी किस तरह की है। आॅडियंस की च्वॉइस अब बदल गई है। वे हर बार नई तरह की कहानियां देखना पसंद करते हैं। अब कैरेक्टर की इंपोर्टेंसी बढ़ गई हैं। ग्लैमर के सहारे फिल्म सुपरहिट करना मुश्किल काम है।

जेंडर एक्विलिटी से दूर है इंडस्ट्री: उन्होंने कहा कि फैन्स मेरे कैरेक्ट के नाम को याद रखते हैं। एक एक्टर के लिए इससे बढ़ा कॉम्प्लीमेंट कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि महिला प्रधान फिल्में बन रही है। महिलाओं की अपनी कहानियां और एम्बिशन होते हैं। महिला प्रधान की कई अच्छी कहानियां हो सकती हैं। इंडस्ट्री में बदलाव आ रहा है, फिलहाल इंडस्ट्री जेंडर एक्विलिटी से दूरी है। मैं हर सीन के लिए एक्ट्रा एफर्ट्स लगाती हूं। तीन दिन पहले इंडस्ट्री में मुझे 5 साल पूरे हुए हैं। मैं हर रोल के लिए पूरी तैयारी के साथ स्टेज पर जाती हूं।