हाईकोर्ट ने कहा, हमेशा कलंकित करने का अभियान न बने ‘मी टू’

हाईकोर्ट ने कहा, हमेशा कलंकित करने का अभियान न बने ‘मी टू’

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, यौन उत्पीड़न की शिकायतों जिनमें शिकायतकर्ताओं के नाम गुमनाम रहे, पर आधारित लेखों को लगातार दोबारा पब्लिश कर मी टू के कैम्पेन को भड़काना एक पुरुष की निजता का हनन है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने एक मीडिया हाउस के एमडी के खिलाफ दोबारा आर्टिकल पब्लिश करने पर रोक लगाते हुए कहा, मी टू कैम्पेन किसी को हमेशा कलंकित करने वाला कैम्पेन नहीं बन सकता। अगर एक ही आर्टिकल को बार-बार प्रकाशित करने की इजाजत दी जाती है, तो याचिकाकर्ता का अधिकार गंभीर रूप से खतरे में पड़ जाएगा।

एक आर्टिकल बार-बार छापा

आरोपी ने कहा, उसके खिलाफ एक आर्टिकल बार-बार छापे गए और वह मीडिया का जाना-माना चेहरा हैं और आधारहीन आरापों के कारण उन्हें काफी टॉर्चर और दुख झेलना पड़ा। 14 दिसंबर को कोर्ट ने लेखों पर रोक लगाई थी, लेकिन उन्हीं लेखों को दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस्तेमाल किया गया था।