सूर्य ग्रहण मंदिरों के कपाट रहे बंद मोक्ष के बाद हुआ पूजन अर्चन

 22 Jun 2020 12:42 AM  2

जबलपुर । रविवार को आषाढ़ मास की अमावस्या और सूर्य ग्रहण का संयोग बना। ज्योतिषाचार्यो के अनुसार सूर्य ग्रहण सुबह साढ़े 10 बजे से प्रारंभ हुआ। मोक्ष 2 बजकर 3 मिनट रहा। इसके बाद पूजा पाठ शुरु हुआ। सूर्य ग्रहण पर समूचे शहर और आसपास के क्षेत्रों में सन्नाटे के हालात रहे। मंदिरों के कपाट बंद रहे तो सनातन धर्म प्रेमी घरों पर ही ग्रहण के अनिष्टकारी प्रभावों से मुक्ति के लिए भगवत,अराधना एवं जप किया। वहीं सूर्य ग्रहण को देखने के लिए शहरवासियों ने तरह-तरह के जतन किए। गढ़ाफाटक की कुछ युवतियां मानसी,मोना,शिवानी,प्रियंका ने अपने घरों की छत में रहकर एक्स-रे के माध्यम से सूर्य ग्रहण के दीदार किए तो वहीं ग्वारीघाट क्षेत्र के सौरभ और उनके बेटे हर्ष वासवानी ने दूरबीन के जरिए सूर्य ग्रहण को देखा।

प्रतिबंध के बाद भी नर्मदा तट पहुंचे श्रद्धालु

आषाढ़ी अमावस्या और ग्रहण एक साथ है,जिसके प्रभाव से बचने और कोरोना संक्रमण के कारण लोग एक स्थान पर एकत्रित न हो सके। जिसके कारण जिला प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं को नर्मदा तट पर स्नान-दान करने के लिए प्रतिबंधित किया था। इसके बावूजद भी ग्वारीघाट नर्मदा तटों पर पुलिस जवानों की तैनाती के बाद भी श्रद्धालु नर्मदा तट पर स्नान- दान करने के लिए पहुंचे।

अधिकांश लोग टीवी से लेते रहे अपडेट

सदी के सबसे बड़े सूर्य ग्रहण के दौरान अधिकांश लोगों ने टीवी से चिपके रहे। वैज्ञानिकों और ज्यातिषाचार्यो ने द्वारा दी गई जानकारी और विश्लेषण को ध्यान से समझने के बाद शहर के युवक-युवतियों ने एक्सरे और दूरबीन से सूर्य ग्रहण को देखा। वहीं कहीं-कहीं तो सोशल डिस्टेंसिंग पालन किए बिना ही युवतियों ने सूर्य ग्रहण के दीदार किए।

सुबह थोड़ी रही हलचल

रविवार की सुबह ग्रहण स्पर्श के समय 10.30 के पूर्व सड़कों पर थोड़ी हलचल दिखी। किंतु ग्रहण स्पर्श के बाद सड़के लगभग शांत हो गई थी। मध्यकाल 12.18 को तो चारों तरफ सूनसपाट था,वैज्ञानिकों सहित कुछ लोगों ने छतों और घर के अहाते से सूर्यग्रहण के दीदार किए। वहीं शनिवार की रात से सूतक काल से ही आरंभ कर दिए थे।