मजदूरी नहीं मिलने से होती है चिंता, कैसे होगा गुजारा

मजदूरी नहीं मिलने से होती है चिंता, कैसे होगा गुजारा

 दिनभर मेहनत मजदूरी करके घर का गुजारा हो जाता है था। कभी मकान बनाने का तो कभी दूसरा काम मिल जाता था। इससे अपने और परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का बंदोबस्त हो जाता था। लेकिन लॉकडाउन ने भूखे रहने तक की नौबत ला दी। यह कहना है बैरागढ़ इलाके के आरा मशीन रोड पर रहने वाले 53 साल के अमर खत्री का। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के चलते ढाई महीने तक काम बंद रहा। इस दौरान घर का गुजारा मुश्किल हो गया। हालांकि, कुछ सामाजिक संस्थाओं की मदद से राशन मिला, लेकिन कभी-कभी तो भूखे तक रहना पड़ा। हालांकि अब लॉकडाउन हट गया और मजदूरी करने की छूट दी गई है। लेकिन लोग अभी भी निर्माण कार्य और मजदूरी करवाने से डर रहे हैं, क्योंकि कोरोना संक्रमण का खतरा रहता है। अभी पहले जैसी मजदूरी का काम नहीं मिलने से अपना और परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। सरकार को मदद करनी चाहिए।