दो सीट पर जीत पक्की थी, फिर भी भाजपा ने नहीं लिया रिस्क, सपा-बसपा, निर्दलियों को भी साधा

दो सीट पर जीत पक्की थी, फिर भी भाजपा ने नहीं लिया रिस्क, सपा-बसपा, निर्दलियों को भी साधा

 भोपाल । राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने दो सीट पर जीत पक्की होते हुए भी कोई रिस्क नहीं लिया। वहीं कांग्रेस को बाजी पलटने का डर था, जिससे पहले वरीयता पर उम्मीदवार बनाए गए दिग्विजय सिंह के लिए 54 वोट तय किए गए। जबकि एक सीट के लिए 52 वोट की जरूरत थी। कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद से माना जा रहा था कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा के कुछ विधायक टूट सकते हैं। इस आशंका को देखते हुए भाजपा ने स्ट्रेटजी बदली तथा बसपा, सपा, निर्दलीय विधायकों को शामिल करने में सफलता हासिल की। भाजपा के पास 107 विधायक होने से दो सीटों पर जीत पक्की थी। कांग्रेस के पास 92 विधायक होने से एक सीट पर जीत तय थी। कांग्रेस को उस समय झटका लगा, जब 17 जून को दो निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा विधायक भाजपा के खेमे में चले गए। इस तरह भाजपा के पास कुल 113 वोट हो गए।

 तीन सीट के लिए चार प्रत्याशी

चुनाव में तीन सीट के लिए चार प्रत्याशी थे। भाजपा से प्रथम वरीयता पर ज्योतिरादित्य सिंधिया और दूसरे वरीयता पर सुमेर सिंह सोलंकी उम्मीदवार बनाए गए थे। कांग्रेस ने प्रथम वरीयता में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा दूसरी वरीयता में फूल सिंह बरैया को रखा था। भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली। जीत के लिए हर प्रत्याशी को 52 वोटों की जरूरत थी। बरैया को 38 वोट मिले।

सिंधिया का प्रमाण पत्र सिलावट ने लिया

चुनाव जीतने के बाद सिंधिया का विजयी प्रमाण-पत्र मंत्री तुलसी सिलावट, विधायक अरविंद सिंह भदौरिया और विधायक रमेश मैंदोला ने लिया। जबकि भाजपा के दूसरे प्रत्याशी सुमेर सिंह सोलंकी ने खुद प्रमाण-पत्र लिया। वहीं कांग्रेस से जीते दिग्विजय सिंह का प्रमाण पत्र पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और जेपी धनोपिया ने लिया। विजयी प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र निर्वाचन अधिकारी एपी सिंह ने दिए।

 अपने अंतर्कलह से गिरी थी कांग्रेस सरकार:संजीव

बसपा विधायक संजीव सिंह संजू ने वोट डालने के बाद मीडिया से कहा कि हम विकास के साथ हैं। कांग्रेस सरकार अपने अंतर्कलह से गिरी है। मैं क्षेत्र के विकास के लिए शिवराज सरकार के साथ हूं। इधर, सपा विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सुमेर सिंह सोलंकी को वोट दिया है। विकास के लिए वे भाजपा प्रत्याशी के साथ हैं।

 क्रॉस वोट के बाद जाटव बोलेसिंधिया कोवोट किया था

क्रास वोट करने वाले भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव ने कहा कि वे समझ नहीं पाए कि क्रॉस वोट करने की गलती कैसे कर गए। उन्होंने तो सिंधिया को वोट दिया था। मैं संगठन के साथ हूं और पार्टी के साथ उनकी किसी भी प्रकार की नाराजगी नहीं है।

बागी विधायकों के कारण ये स्थिति बनी: डॉ. गोविंद सिंह

इधर, पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने दोनों जीते हुए उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन कांग्रेस के बागी विधायकों के कारण हमारी ये स्थिति बनी। उन्होंने दावा किया कि उप चुनाव में जीत हमारी ही होगी।

भाजपा  को दलिततों की चिंता है, तो बरैया को वोट क्यों नहीं दिया

कांग्रेस विधायक कांतिलाल भूरिया ने कहा कि हम एक सीट जीत चुके हैं। भाजपा के दलित विरोधी आरोप पर उन्होंने कहा कि भाजपा को अगर दलितों की इतनी ही चिंता है, तो बरैया को वोट क्यों नहीं किया।

 कोरोना का डर: वोटिंग के पहले की गई जांच

मतदान के दौरान कोरोना का डर बना रहा। विधानसभा परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। यहां गोलों पर कुर्सियां रखी गई थीं। सभी विधायक एक-दूसरे से दूरी पर रहे। वोट डालने के दौरान विधायक कतार में खड़े हुए। मतदान के पहले कर्मचारियों और अधिकारियों की जांच भी की गई थी।

पहले शिवराज फिर कमल नाथ से मिले शेरा

मतदान के दौरान निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा आकर्षण का केंद्र बने रहे। पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा पहुंचने पर शेरा ने उनसे मुलाकात की। इ्रसके कुछ देर बाद जब पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ पहुंचे, तो शेरा उनके पास भी मिलने के लिए पहुंच गए। इससे दोनों तरफ के विधायकों में शेरा चर्चा का विषय बने रहे।