घर में पीपल या पीपल में घर चकित कर रहा पनागर में अनोखा भवन

घर में पीपल या पीपल में घर चकित कर रहा पनागर में अनोखा भवन

जबलपुर । ये घर में पीपल है या पीपल में घर। जो भी इसे देखता है आश्चर्यचकित रह जाता है। दरअसल पनागर क्षेत्र में 126 साल पुराने पीपल के पेड़ को बचाने के लिए भवनस्वामी ने इसकी डिजाइन में ही परिवर्तन करते हुए इस तरह से घर बनवाया कि पीपल के पेड़ की डालों को नुकसान न हो। जबलपुर से लगे पनागर इलाके में यह अनोखा घर है। इस घर को ट्री हाउस कहना भी गलत नहीं होगा। इस घर की खासियत भी बेहद दिलचस्प है। सुंदर घर बनाने का सपना भला किसका नहीं होता है। बेहतर डिजाइन, यूनिक इंटीरियर और आधुनिक सुविधाओं से युक्त घर का नजारा इन दिनों आम है, लेकिन एक पेड़ के लिए कोई अपने घर की डिजाइन को ही बदल दे तो आप क्या कहेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि 126 साल पुराने पीपल के पेड़ को बचाने के लिए मकान मालिक ने उसे काटे बिना ही घर बनाया है। तीन मंजिला इस घर में सबसे नीचे के फ्लोर में पीपल की जड़ और ऊपर पेड़ की शाखाएं हैं।

28 साल पहले रखी गई थी नींव

ये घर डॉ मोतीलाल केशरवानी का है। वो तो अब इस दुनिया में नहीं रहे। इस घर की नींव 28 साल पहले रखी गई थी। घर को स्व. डॉ मोतीलाल केशरवानी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर बनवाया था। ये घर डॉ मोतीलाल केशरवानी का है। वो तो अब इस दुनिया में नहीं रहे। घर को स्व. डॉ मोतीलाल केशरवानी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर बनवाया था।

पेड़ की छांव में बैठकर पढ़े थे

उनके बेटे के मुताबिक मोतीलाल केशरवानी इस पेड़ की छांव में पले बढ़े थे, इसलिए जब यहां मकान बनाने की बारी आई तो उन्होंने इसे अपने साथ रखने की इच्छा जाहिर की। बेशक स्व. मोतीलाल पेड़ों के महत्व को समझते थे। 28 साल पहले पर्यावरण बचाने की इस नेक सोच का नतीजा है कि आज भी ये वृक्ष सुरक्षित है।

33 करोड़ देवी-देवताओं का वास

पर्यावरण संरक्षण के साथ -साथ पीपल के वृक्ष का आध्यात्मिक महत्व भी है। मान्यताओं के मुताबिक पीपल के वृक्ष में 33 करोड़ देवी देवताओं का भी वास होता है। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में यदि कहीं भी पीपल का पौधा ऊग आए तो इसे नहीं हटाया जाता।