‘हमारी पीढ़ी ने जो स्ट्रगल किया आज के रियलिटी शो के सिंगर्स नहीं कर सकते’

 02 Feb 2020 01:40 AM  896

भोपाल। ‘हमारे जमाने में ऐसा कोई भी रियलिटी शो नहीं था, उस समय हम एक जगह से दूसरी जगह बाजा तबला लेकर घूमा करते थे। मेरे संगीत सफर की शुरुआत भी मध्यप्रदेश से हुई है। इंदौर, भोपाल, रतलाम और विदिशा जैसे जगहों पर लोगों ने प्यार दिया। मेरा यही कहना है कि जो स्ट्रगल हमारी पीढ़ी ने किया वो आज की पीढ़ी बिलकुल नहीं कर सकती।’ यह कहना है गायक और संगीतकार रूपकुमार राठौड़ का जो एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने भोपाल पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अपने अनुभव पीपुल्स समाचार से शेयर किए।

इंडियन आइडल चुने गए वो आज कहां हैं?

रियलिटी शो में जाने वाले पार्टिसिपेंट्स को घर से निकलते ही स्टेज मिल गया और पूरे वर्ल्ड में इन्हें लोग जानने लगे, क्योंकि जो दिखता है वही बिकता है। मुझे खुशी होती है कि उन्हें बना बनाया स्टेज मिला है और इनके पीछे स्पोंसर्स हैं, डायरेक्टर्स और कैमरामैन हैं। इन्हें अपॉरट्यूनिटी बहुत है। मुझे बस इस बात की चिंता है कि जो पिछले 11 इंडियन आइडल जो चुने गए हैं वो आज के समय में कहां हैं। अब उनकी यह हालत है कि वो स्ट्रगल भी नहीं कर सकते,क्योंकि उनके दिमाग में ग्लैमर आ गया है कि उन्हें इसके सिवा दिखाई नहीं देता। संगीत तपने का काम है जब तक तपेंगे नहीं, तब तक चमक नहीं आएगी।

आज भी किसी शो को लाइटली नहीं लेते

मैंने अक्सर देखा है कि सिंगर आज के समय में जितने भी लाइव कॉन्सर्ट कर रहे हैं वो साउंड चेक करने कम ही जाते हैं। मैं और मेरी पत्नी सुनाली राठौड़ आज भी हम दोनों को ऐसा लगता है कि यह हमारा पहला कॉन्सर्ट या फिर आखिरी कॉन्सर्ट है। हर कॉन्सर्ट उतनी ही ईमानदारी और सच्चाई से करना चाहिए। किसी भी शो को मैं लाइटली नहीं लेता। आमतौर पर सभी सिंगर्स के साउंड इंजीनियर होते हैं,लेकिन आज भी मैं खुद साउंड चेक करने जाता हूं। आजकल के जितने भी यंगस्टर्स गाने गा रहे हैं उनका मेकओवर हो जाता है और उनका स्टाइल बदल जाता है। उन्हें यह समझने की जरूरत है कि गाना तो सीखने की चीज है और अपने गुरुओं के साथ बैठने की चीज है। यह उन चैनल वालों की भी करना चाहिए जो आजकल नहीं हो रहा है। शो खत्म होते हैं, बच्चा काम ढूंढने लगता है क्योंकि शो के दौरान गाए हुए गाने इतनी बार सुने होते हैं कि आपको याद होते हैं। नए सिंगर्स जब कोई नया गाना गाने की बात होती है और जिस निखार के साथ गा सकते हैं, वही उनकी असली परीक्षा है।

वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी करना मेरा शौक है

मुझे ऐसा लगता है कि संगीत जो है वो नेचर से जुडी चीज है। अभी हम जिस कंक्रीट जंगल में रहते हैं तो कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि क्रिएटिविटी हो नहीं पा रही है। जब आप नेचर में आते हैं नए-नए आइडियाज आते हैं और अपने आप को रिचार्ज महसूस करते हैं। इसलिए पिछले दो साल से कैमरा लेकर जंगलों में घुमा हूं और मेरी कॉफी टेबल बुक भी तैयार की है। मैंने इस बुक में इंडिया ही नहीं अफ्रीका के जंगल के साथ मैंने मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ और कान्हा जो मेरा सबसे ज्यादा फेवरेट जगहों में से एक है उनके भी फोटोग्राफ्स इसमें जोड़े गए है।

कमर्शियल सिनेमा की डिमांड है पुराने गानों का रिक्रिएशन : फिल्मों में पुराने गाने रिक्रिएट होने पर गायक रूप कुमार राठौड़ ने कहा कि आज के समय में सीडी और कैसेट बंद हो गई है। आज के समय में सब कुछ आॅनलाइन म्यूजिक हो गया है। हमारी उम्र के लोग इंटरनेट पर गाने डाउनलोड करने से रहे। वो रोज रेडियो पर सुनने को मिल रहा है वही बहुत है। आमतौर पर रेडियो पर भी ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं है कि वो नॉन-फिल्मी गानों को बजाए। जब नॉन-फिल्मी गानों में क्रिएटिविटी होती है , क्योंकि उसमें किसी की दखलंदाजी नहीं होती। डायरेक्टर्स की भी डिमांड आइटम सॉन्ग की है जिसे सुनकर पब्लिक पिक्चर देखने के लिए सिनेमा देखने पहुंचे। इसी वजह से अच्छी शायरी, अच्छे कम्पोजिशन ये धीरे धीरे कम होते जा रहा है और जो रीमिक्स चल रहे है उनकी डिमांड बढ़ गई है।

संदेसे आते हैं...सुन झूमे श्रोता

मिंटो हॉल में आयोजित रूप कुमार राठौड़ और सुनाली राठौड़ के लाइव कॉन्सर्ट के दौरान उन्होंने शुरूआत फिल्म वीर जारा के ‘तेरे लिए ...’ से शुरूआत की। इसके बाद जैसे उन्होंने समां बांध दिया। इस दौरान उन्होंने ‘कुन फाया कुन...’ सुनाया। इसी क्रम में उन्होंने फिल्म बॉर्डर का ‘संदेसे आते हैं...’ गाकर माहौल देश भक्ति से भर दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्म अग्निपथ का ‘ओ सैयां ...’ गाकर माहौल रोमांटिक कर दिया। डुएट परफॉर्मेंस देते हुए सुनाली और रूप कुमार राठौड़ ने ‘निगाहें मिलाने को जी चाहता है...’ और ‘प्यार में छुप-छुप के मिलने का मजा कुछ और है...’ सुनाया। ‘ऐसा कोई जिंदगी से वादा तो नहीं था,तेरे बिना जीने का इरादा तो नहीं था...’ गाकर सभी श्रोताओं का मनोरंजन किया।