बेरोजगारी दर अप्रैल माह में 8.11% रही, यह 4 माह में सबसे अधिक

बेरोजगारी दर अप्रैल माह में 8.11% रही, यह 4 माह में सबसे अधिक

नई दिल्ली। अप्रैल में देश में जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई चार महीने के टॉप पर रहा और कार बनाने वाली अधिकांश कंपनियों की बंपर बिक्री रही, लेकिन रोजगार के मोर्चे पर अच्छी खबर नहीं है। अप्रैल में देश में बेरोजगारी दर 8.11 फीसदी पहुंच गई है। यह इसका चार महीने का उच्चतम स्तर है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडिया इकोनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक, इस दौरान शहरी इलाकों में बेरोजगारी 8.51 से बढ़कर 9.81 फीसदी पहुंच गई, जबकि ग्रामीण इलाकों में इसमें गिरावट आई है। अप्रैल में ग्रामीण इलाकों बेरोजगारी की दर 7.47 से गिरकर 7.34 फीसदी रह गई। इससे पहले मार्च में पूरे देश में बेरोजगारी दर 7.8 परसेंट थी।

लेबर पार्टिसिपेशन रेट में बढ़ोतरी बड़ा कारण

लेबर पार्टिसिपेशन रेट में बढ़ोतरी से देश में बेरोजगारी दर बढ़ी है। अप्रैल में यह 41.98% रहा, जो तीन साल में इसका उच्चतम स्तर है। सीएमआईई के प्रमुख महेश व्यास के अनुसार, लेबर पार्टिसिपेशन रेट बढ़ने से देश में बेरोजगारी दर बढ़ी है। अप्रैल में देश की लेबर फोर्स 2.55 करोड़ बढ़कर 46.76 करोड़ पहुंच गई। इसमें से करीब 87% लोग रोजगार पाने में कामयाब रहे। इसकी वजह यह है कि अप्रैल में 2.21 करोड़ अतिरिक्त जॉब पैदा हुए। अप्रैल में रोजगार दर बढ़कर 38.57% पहुंच गया, जो मार्च 2020 से इसका उच्चतम स्तर है।

ग्रामीण क्षेत्रों में मिला 94.6% को रोजगार

अप्रैल में शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़े। ग्रामीण इलाकों में 94.6% लेबर फोर्स को रोजगार मिला, जबकि शहरी इलाकों में केवल 54.8% को नई नौकरी मिली। देश में दिसंबर 2022 मे बेरोजगारी की दर 8.3 % पहुंच गई थी, लेकिन जनवरी में यह गिरकर 7.14 % रह गई। फरवरी में इसमें फिर तेजी आई और यह 7.45 % पर पहुंच गई। आरबीआई ने अप्रैल बुलेटिन में कहा था कि जनवरी से मनरेगा के तहत काम की डिमांड में गिरावट आ रही है। इसकी वजह यह है कि फसल की बुआई का रकबा बढ़ा है और इनफॉर्मल सेक्टर में रोजगार में रिकवरी देखने को मिली है।

इकोनॉमी की हेल्थ को बताती है बेरोजगारी दर

सीएमआईई के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत को बेरोजगारी दर सही तरह से बताती है, क्योंकि यह देश की कुल जनसंख्या में कितने बेरोजगार हैं, इसको बताती है। आने वाले समय में बेरोजगारी दर सरकार के लिए कठिन चुनौती हो सकती है।

कैसे तय होती है बेरोजगारी दर?

दिसंबर में बेरोजगारी दर 8.11% रहने का मतलब यह है कि काम करने को तैयार हर 1000 वर्कर में से 81 को काम नहीं मिल पाया। सीएमआईई हर महीने 15 से अधिक उम्र के लोगों का घर-घर जाकर सर्वे करता है और उनसे रोजगार की स्थिति की जानकारी लेता है। इसके बाद जो परिणाम मिलते हैं, उनसे रिपोर्ट तैयार की जाती है।