शहर में 750 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां नगर निगम रिकॉर्ड में केवल 216 दर्ज

शहर में 750 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां नगर निगम रिकॉर्ड में केवल 216 दर्ज

इंदौर। शहर में छोटी-बड़ी 750 से अधिक अवैध कॉलोनियां हैं। लंबे समय से इन कॉलोनियों के लोग वैधता को लेकर शासन स्तर पर अपनी बात पहुंचा रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लग रही है। निगम के रिकॉर्ड में 216 कॉलोनियां अवैध हैं। शेष कॉलोनियां शासकीय जमीन पर बसी हैं तो कुछ कॉलोनियों के मामले कोर्ट में विचाराधीन होने से उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी क्रम में विधानसभा चुनाव से पहले निगम ने शहर की कई अवैध बस्तियों को वैधता का प्रमाण पत्र देने की तैयारी कर ली है।

पूर्व में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आदेश पर 100 कॉलोनियों के दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद कार्यक्रम आयोजित कर कॉलोनी के रहवासी संघों को वैधता का प्रमाण पत्र दिया गया है। अगले माह 23 कॉलोनियों को वैधता में शामिल कर प्रमाण पत्रों का वितरण किया जाएगा। इन कॉलोनियों के लिए दावे- आपत्तियां बुलाई गई हैं। उनका निराकरण करने अलग से टीम बनी है। यह टीम निराकरण की रिपोर्ट जल्द पेश करेगी, इसके बाद रहवासी संघों को आमंत्रित कर प्रमाण पत्र बांटे जाएंगे।

25 से 30 करोड़ का राजस्व मिलेगा

जिन 100 कॉलोनियों को वैधता के दायरे में रखा गया है, वहां विकास कार्यों के लिए शुल्क लिया जाएगा। रजिस्ट्री, नक्शा पास कराने, टैक्स वसूलने से शासन को प्रतिवर्ष 25 से 30 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी होगी।

जल्द होगा निर्णय

करीब दो दशक जोन क्रमांक आठ में आने वाले तुलसी नगर के रहवासी भी अपनी कॉलोनी को लेकर निगम के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी तक केवल आश्वासन ही मिल सका है। जल्द ही तुलसी नगर की समस्या का भी निराकरण किया जाएगा।

कई कॉलोनियां 50 साल पुरानी

कुछ कॉलोनियां ऐसी भी हैं, जिनकी बसाहट को 50 साल से अधिक का समय हो चुका है। नोटरी पर मकान बने हैं। रहवासियों ने अवैध तरीके से रजिस्ट्री भी करा ली है, लेकिन बैंक में कॉलोनी अवैध होने से रजिस्ट्री पर लोन नहीं मिल पा रहा है। इन कॉलोनियों को मूलभूत सुविधाएं भी मिल रही हैं। यही कारण है कि कई लोग कॉलोनी वैध होने के बाद संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं करा रहे हैं।

नहीं आ रहे आवेदन

निगम के सूत्रों ने बताया कि जिन कॉलोनियों को वैध का दर्जा मिला है, वहां के रहवासियों ने अभी तक अन्य निर्माण के लिए नक्शा आवेदन नहीं लगाया है। कॉलोनियों से नियमानुसार विकास शुल्क, सम्पत्ति, जल और कचरा संग्रहण शुल्क लिया जाएगा। इससे निगम की आय में अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी। शुल्क और टैक्स वसूलने शीघ्र ही निगम की टीम रहवासियों के घर पहुंचेगी।